जानिए ब्रेन हेमरेज के लक्षण, कारण, बचाव और भी बहुत कुछ

ब्रेन हेमरेज एक वैश्विक समस्या बन चुकी है इसलिए ब्रेन हेमरेज क्या है की चिंता सभी को सता रही है। ब्रेन हेमरेज की समस्या से पीड़ित व्यक्ति को अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन कठिनाइयों का उचित उपचार सही समय पर न हो तथा एक छोटी सी भी चूक हो जाए तो दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ब्रेन हेमरेज क्या है? ब्रेन हेमरेज कैसे होता है? ब्रेन हेमरेज क्यों होता है? ब्रेन हेमरेज के लक्षण क्या है? लोगों को इन विषयों पर अधूरी और गलत जानकारी है। लोगों को  ब्रेन हेमरेज का मतलब भी नहीं पता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर सरल-सहज भाषा में ब्रेन हेमरेज का मतलब आपके सामने प्रस्तुत है ब्रेन हेमरेज पर एक अति महत्वपूर्ण लेख जो पाठकों को जागरूक और सतर्क करने में सहायक होगा।

इस लेख में ब्रेन हेमरेज क्या है, ब्रेन हेमरेज का मतलब, ब्रेन हेमरेज कैसे होता है, ब्रेन हेमरेज क्यों होता है, ब्रेन हेमरेज के लक्षण, ब्रेन हेमरेज के कारण, ब्रेन हेमरेज कितने दिन में ठीक होता है, ब्रेन हेमरेज में जीवित रहने की संभावना क्या है, ब्रेन हेमरेज का इलाज, ब्रेन हेमरेज से बचाव कैसे करें और निष्कर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

ब्रेन हेमरेज क्या है? (Brain Hemorrhage In Hindi)

Brain Hemorrhage In Hindi

मेडिकल साइंस की तकनीकी परिभाषा में ब्रेन हेमरेज क्या है का उत्तर खोज लिया गया है। आखिर ब्रेन हेमरेज क्या है? ब्रेन या दिमाग में स्थित ब्लड आर्टरी से लीकेज होने के कारण आर्टरी का नेटवर्क बाधित हो जाता है। लीकेज के पश्चात दिमाग में रक्त तेजी से फैलने लगता है। ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिस कारण मस्तिष्क पर प्रेशर बनने लगता है। इस अवस्था को मेडिकल टर्मिनोलॉजी में इंट्राक्रेनियल हेमरेज कहते हैं। ब्रेन कोशिकाओं और खोपड़ी के बीच ब्लड की लीकेज होती है। ऐसा भी हो सकता है कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच में ही लीकेज हो। यानी ब्रेन हेमरेज क्या है सवाल का जवाब मस्तिष्क में नस के फट जाने पर रक्त के रिसाव से हुई ऑक्सीजन की कमी और दबाव से जो अवस्था निर्मित होती है उसे ब्रेन हेमरेज कहते हैं।

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ब्रेन हेमरेज का मतलब (Brain Hemorrhage Meaning in Hindi)

आसान भाषा में ब्रेन हेमरेज का मतलब मस्तिष्क में चोट लगना या दिमाग का चोटिल होना है। आपके दिमाग में रक्त धमनी होती है जिसके माध्यम से मस्तिष्क को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। इन धमनियों के फट जाने से दिमाग में रक्त का रिसाव होता है तथा वाहिकाओं के जटिल नेटवर्क से दबाव निर्मित होता है। इसी अवस्था को ब्रेन हेमरेज कहते हैं।कम शब्दों में कहें तो ब्रेन हेमरेज का मतलब एक प्रकार का स्ट्रोक है जो रक्त वाहिकाओं के फटने पर खोपड़ी और मस्तिष्क के बीच में रक्त के रिसाव से होता है। मेडिकल टर्मिनोलॉजी में इसे इंट्राक्रेनियल हेमरेज भी कहते हैं। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन हेमरेज का मतलब ब्रेन ब्लीडिंग भी होता है क्योंकि इस बीमारी में रक्त वाहिकाओं के फटने पर रक्त का रिसाव होता है।

ब्रेन हेमरेज कैसे होता है?

जागरूकता और सतर्कता के अंतर्गत कोई भी पूछे कि ब्रेन हेमरेज कैसे होता है तो उसे बताएं कि ऑक्सीजन प्रदान करने वाली नसें फट जाती हैं तो दिमाग में प्रेशर बनने लगता है। ब्रेन हेमरेज कैसे होता है यह चिंता किसी एक व्यक्ति की नहीं अपितु सकल संसार की चिंता बन चुकी है। ब्रेन हेमरेज एक वैश्विक समस्या बन चुकी है। आइए इसे विस्तार से समझने का प्रयास करें। किसी भी कारण से जब मस्तिष्क की नस फट जाती है तो दिमाग में रक्त का रिसाव होने लगता है। तत्पश्चात् दिमाग में प्रेशर बनने लगता है। दरअसल ये प्रेशर ऑक्सीजन की कमी से होता है। रक्त वाहिकाओं द्वारा मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन तथा अन्य पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। ऑक्सीजन की कमी और प्रेशर के चलते ब्रेन हेमरेज होने की संभावना पक्की हो जाती है। अगर किसी भी आम जन  के मन में यह चिंता है कि ब्रेन हेमरेज कैसे होता है तो उसकी चिंता का समाधान जागरूकता और सतर्कता ला सकती है।

ब्रेन हेमरेज क्यों होता है?

अगर आपके मन में ये चिंता है कि ब्रेन हेमरेज क्यों होता है तो जान लीजिए की सिर में गंभीर चोट लग जाने से, मस्तिष्क की नस दब जाने से, मस्तिष्क में गांठ के बन जाने से या ब्लड प्रेशर बढ़ जाने से ब्रेन हेमरेज हो जाता है। इसके अतिरिक्त विटामिन के की कमी से भी ब्रेन हेमरेज होता है। विटामिन के का पूरा नाम विटामिन कौमाडिन है। हमारे शरीर को अगर हमें विटामिन के पर्याप्त मात्रा में मिलता रहे तो हृदय, लीवर, ब्लड प्रेशर, एनीमिया तथा अन्य रक्त संबंधी रोग कभी भी शरीर में निवास ग्रहण नहीं कर सकते। ये खून में कैल्शियम के स्तर या लेवल को भी नियंत्रित करता है। विटामिन के की कमी से खून का थक्का आसानी से बन जाता है। साथ ही यह शरीर में रक्त के प्रवाह को भी विटामिन के नियंत्रित करता है।

ब्रेन हेमरेज के लक्षण

एक सामान्य, साधारण मनुष्य ब्रेन हेमरेज के लक्षण को आसानी से नहीं पहचान सकता। क्यों? ब्रेन हेमरेज के लक्षण आसानी से दिख जाते हैं लेकिन उनकी पहचान कर पाना इतना आसान नहीं होता। अन्य बीमारी के साथ ब्रेन हेमरेज के लक्षण इतने मिलते-जुलते हैं कि ये किसी को भी भ्रमित कर सकते हैं। इसलिए जागरूकता के साथ-साथ लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि इन लक्ष्यों की तुरंत पहचान कर लेने के पश्चात मरीज को सही समय पर सही उपचार मिल सके। डॉक्टरों ने गंभीर अध्ययन और शोध के पश्चात कुछ सामान्य ब्रेन हेमरेज के लक्षण को चिन्हित किया है जो पीड़ित या उसके परिवार के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

आसान भाषा में ब्रेन हेमरेज के लक्षण को इस प्रकार से सूचीबद्ध किया जा सकता है :

  • शरीर के एक भाग का लकवाग्रस्त होना : हाथ या पैर या दोनों के किसी एक भाग में लकवा आ जाता है। इस लकवे के कारण पीड़ित व्यक्ति को झुनझुनी चढ़ जाती है तथा प्रभावित भाग सुन्न हो जाता है। कमजोरी की भी अनुभूति होती है।
  • चेहरे का लकवाग्रस्त होना : ब्रेन हेमरेज में व्यक्ति का चेहरा भी लकवाग्रस्त हो जाता है। चेहरे की मांसपेशियां भारी और कमजोर हो जाती हैं। ये भारीपन देखने में सूजन जैसा प्रतीत हो सकता है। इसे फेशियल पैरालिसिस भी कहते हैं।
  • अचानक से सिर दर्द : ब्रेन हेमरेज में ब्लड लीकेज के कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिस कारण दिमाग में प्रेशर बनने लगता है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति को सिर दर्द की समस्या भी हो सकती है।
  • बार-बार उल्टी होना : उल्टी की अनुभूति होना या बार-बार उल्टी होना भी इस घातक बीमारी का लक्षण है लेकिन ऐसे संकेत अन्य कई बीमारियों में भी देखने को मिलते हैं। इसलिए ब्रेन हेमरेज के इस लक्षण को अन्य बीमारी से जोड़ कर भ्रम भी पैदा हो सकता है।
  • चक्कर आना : आँखों के सामने अचानक से अन्धेरा छा जाता है और पीड़ित व्यक्ति चक्कर खा कर गिर पड़ता है। ऐसा भी हो सकता है कि उसका सिर बार-बार चकराए। दिमाग में ब्लड लीकेज के कारण अचानक से प्रेशर निर्मित हो जाता है। थकान और कमजोरी बने रहने के कारण ऊर्जा भी घट जाती है। इसलिए चक्कर आ जाते हैं।
  • अनावश्यक थकान और कमजोरी : झुनझुनी चढ़ने और मांसपेशियां सुन्न होने के कारण केवल प्रभावित अंग में ही नहीं अपितु पूरे शरीर में थकान और कमजोरी बनी रहती है। शरीर की ऊर्जा निरंतर घटती रहती है इस कारण पीड़ित व्यक्ति में अकारण थकान बनी रहती है।
  • बोलने में कठिनाई : ब्रेन हेमरेज के मरीज को बोलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी भी प्रकार के शब्द या वाक्य जो बोलने में आसान होते हैं ब्रेन हेमरेज के मरीज को बोलने में कठिनाई होती है। मस्तिष्क के सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक बोलना भी है जिसे मेडिकल साइंस स्पीच फंक्शन ऑफ़ ब्रेन भी कहता है।
  • भ्रमित रहना : शब्द, वाक्य या कथन समझने में पीड़ित व्यक्ति को कठिनाई होती है। आसान वाक्य भी उसे जटिल लगने लगता है तथा बार-बार समझाने पर भी हो सकता है कि उसे कुछ समझ न आए।
  • खाना निगलने में परेशानी : भोजन गले के नीचे नहीं उतरता। खाने का निवाला निगलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। भोजन ग्रहण न कर पाने की इस समस्या को मेडिकल टर्मिनोलॉजी में डिस्फेजिया कहते हैं।
  • नेत्र रोग : नेत्र संबंधी रोग होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। दृष्टि में धुंधलापन या दृष्टि का पूर्ण रूप से खो जाना संभावित है। ब्रेन हेमरेज के कारण सबसे पहला दुष्प्रभाव आँखों पर ही पड़ता है।
  • श्वास की समस्या : लम्बी श्वास लेने या जल्दी-जल्दी सांस छोड़ने में समस्या हो सकती है। श्वास की सामान्य गति प्रभावित रहती है।
  • कोमा में चले जाना : स्वयं का और आसपास के बोध का लोप हो जाता है अर्थात ब्रेन हेमरेज में व्यक्ति की चेतना ही नहीं रहती। इस कारण मनुष्य कोमा में भी चला जाता है। चेतना को अंग्रेजी में कॉन्शियसनेस कहते हैं।
  • अनियंत्रित मांसपेशियां : शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करने का कार्य हमारे मस्तिष्क का होता है। ब्रेन हेमरेज के कारण मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच संचार बाधित हो जाता है। इस कारण वे अपना नियंत्रण खो देती हैं।
  • गर्दन में परेशानी : गर्दन में असहनीय पीड़ा और जकड़न की शिकायत होने लगती है। गर्दन में जकड़न के कारण उसकी मांसपेशियां कठोर या सख्त हो जाती हैं।

दौरे पड़ना : मस्तिष्क में अचानक से विद्युतीय तरंगों का परवाह सक्रीय होता है जिससे मांसपेशियों पर नियंत्रण समाप्त हो जाता है और परिणामस्वरूप तेज झटकों की अनुभूति होती है।

ब्रेन हेमरेज के कारण

दिमाग में ब्लड आर्टरी या रक्त वाहिका के फटने से दिमाग की तीन परतीय कोशिकाओं में रक्त के फ़ैल जाने के कारण ब्रेन हेमरेज हो जाता है। लेकिन इस नस के फटने के कई संभावित कारण हैं जिसे समझने की आवश्यकता है।

किसी व्यक्ति में मस्तिष्क के रक्त रिसाव को जानने के लिए ब्रेन हेमरेज के कारण नीचे दिए गए हैं :

  • सिर में चोट लगने के कारण : किसी कारणवश सिर में चोट लग जाने के कारण ब्रेन हेमरेज हो सकता है। अमूमन सड़क दुर्घटना और खेल के दौरान चोटिल होने के कारण ब्रेन हेमरेज के सर्वाधिक मामले देखने को मिले हैं। इसके अलावा किसी ऊंची सतह से गिर जाने या फिसल जाने पर भी सिर में चोट लग सकती है जिससे ब्रेन हेमरेज हो सकता है।
  • ब्रेन ट्यूमर के कारण : ट्यूमर की बीमारी होने के कारण दिमाग को ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते जिस कारण प्रेशर बनने लगता है और रक्त का रिसाव  जाता है। यही कारण है कि ब्रेन ट्यूमर से भी ब्रेन हेमरेज होने का खतरा बना रहता है।
  • खून का थक्का बनने के कारण : ब्रेन हेमरेज में प्रमुख रूप से रक्त वाहिका के फट जाने से खून का थक्का बन जाता है जो आगे चल कर इस बीमारी में रूपायित हो जाता है। लेकिन ये खून के थक्के अन्य कारणों से भी बनते हैं।
  • सेरेब्रल एन्यूरिज़्म : अगर किसी व्यक्ति को सेरेब्रल एन्यूरिज़्म है तो उसे ब्रेन हेमरेज होने का खतरा बना रहता है। दिमाग में या उसके आसपास कमजोर रक्त वाहिका के कारण सेरेब्रल एन्यूरिज़्म हो जाता है।
  • आर्टिरियोवेनस मॉलफॉर्मेशन : ब्रेन हेमरेज होने का एक कारण आर्टिरियोवेनस मॉलफॉर्मेशन भी है। इस बीमारी में रक्त वाहिकाओं और नसों का एक ऐसा जटिल समूह निर्मित होता है जिसके चलते अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
  • ब्लड प्रेशर में बढ़ोत्तरी के कारण : ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने से भी ब्रेन हेमरेज हो जाता है। ब्रेन हेमरेज रक्त संबंधी रोग है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर या ब्लड की कोई समस्या है तो  उसके शरीर में ब्रेन हेमरेज जन्म ले लेता है।
  • धूम्रपान के कारण : धूम्रपान करने से रक्त संबंधी रोग हो सकते हैं जैसे हाइपरटेंशन जिसके कारण ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक होने की संभावना बनी रहती है।

ब्रेन हेमरेज कितने दिन में ठीक होता है?

संसार के सभी विशेषज्ञों के जब यह पूछा गया कि ब्रेन हेमरेज कितने दिन में ठीक होता है तो उनका जवाब यह था कि न्यूनतम तीन सप्ताह में ब्रेन हेमरेज ठीक हो सकता है वरना कई महीनें भी लग सकते हैं।  ब्रेन हेमरेज से पीड़ित व्यक्ति के परिजन को यह पीड़ा भीतर ही भीतर खाने लगती है कि ब्रेन हेमरेज कितने दिन में ठीक होता है और यह एक स्वाभाविक चिंता भी है। ठीक होने में लगने वाला समय बीमारी की गंभीरता पर प्रमुख रूप से निर्भर करता है। हालांकि यह इलाज की पद्धति और व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि ब्रेन हेमरेज कितने दिन में ठीक होता है लेकिन अधिकतर मामलों में एक महीना ही लगता है। दीर्घकालिक इलाज होने के कारण मरीज का मनोबल बढ़ाना भी अति आवश्यक हो जाता है।

ब्रेन हेमरेज में जीवित रहने की संभावना क्या है?

अधिकांश मामलों में यह देखा गया है कि जीवित रहने की संभावना पांच वर्ष या उससे कम है। हालांकि व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना के अनेक घटक हैं जैसे स्थान, चिकित्सा पद्धति और व्यक्ति का इम्यून सिस्टम।

ब्रेन हेमरेज का इलाज

ब्रेन हेमरेज का इलाज दो प्रकार से होता है :

  • सर्जिकल ट्रीटमेंट : इसे मस्तिष्क रक्त रिसाव की शल्य चिकित्सा भी कह सकते हैं। यह मरीज के बीमारी की आवश्यकता पर ही किया जाता है। इसे युवाओं पर अधिक किया जाता है क्योंकि वृद्ध लोगों पर सर्जरी करने के पश्चात परिणाम अच्छे होने की संभावना कम रहती है। यह पद्धति उनके लिए भी उपयुक्त है जिनमें उपचार के बाद हेमरेज पुनः आने की संभावना कम हो जायेगी। साथ ही यह पद्धति उनके लिए भी कारगर है जिसके मस्तिष्क के लोबार, सेरिबैलर, कैप्सूल या नॉन-डोमिनेंट हेमिस्फीयर में यह समस्या हुई है क्योंकि यहाँ पर इलाज करना आसान होता है।
  • नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट : नाम से ही स्पष्ट है कि इस प्रकार के इलाज में सर्जरी नहीं की जाती। बूढ़े लोगों में अगर ब्रेन हेमरेज है तो सर्जरी का रिस्क नहीं ले सकते इसलिए उनके लिए यह उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त यह उपचार तब भी उपयुक्त है अगर हेमरेज थैलेमिक जैसे स्थान पर हो जहां सर्जरी संभव नहीं है। नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट तीन तरह की होती है – आईसीपी, सीएफआई और ब्लड प्रेशर बेस्ड ट्रीटमेंट। आईसीपी अर्थात इन्क्रीज़ड इंट्राक्रेनियल प्रेशर जिसमें क्लॉट के कारण हुए प्रेशर को कम किया जाता है। सीएफआई अर्थात क्लॉटिंग फैक्टर इन्फ्यूजन जिसके अंतर्गत मरीज के नस में क्लॉटिंग फैक्टर को डाला जाता है। ब्लड प्रेशर बेस्ड ट्रीटमेंट में मरीज के रक्तचाप को नियंत्रित किया जाता है। 
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ब्रेन हेमरेज से बचाव कैसे करें?

ब्रेन हेमरेज से बचाव करने के लिए आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम और विटामिन के से युक्त आहार लेना चाहिए। ऐसा भोजन ग्रहण करें जिसमें इन पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा हो।

आइए विस्तार से जानें कि ब्रेन हेमरेज से बचाव कैसे करें : 

  • हरी सब्जी करें आहार में शामिल : हरी सब्जी में आयरन होता है जो रक्त संबंधी रोगों जैसे ब्लड प्रेशर, एनीमिया, ब्रेन हेमरेज, स्ट्रोक आदि के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। फाइबर से ब्लड क्लॉटिंग निर्मित होती है इसलिए ये रक्त संबंधी बीमारियों में बहुत लाभकारी होती है। केला आयरन का सबसे अच्छा स्रोत होता है।
  • विटामिन के भी खाना चाहिए : विटामिन के की कमी से ब्रेन हेमरेज होता है। इसलिए ऐसा आहार लेना चाहिए जो विटामिन के से भरपूर हो जैसे केला और ब्रोकोली। हालांकि ब्रोकोली में आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व भी होते हैं। एवोकाडो भी विटामिन के का अच्छा स्रोत है।
  • फाइबर है जरूरी : कद्दू में फाइबर होता है जो ब्रेन हेमरेज के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। अपने आहार में कद्दू को अवश्य रूप से शामिल करें।
  • हेलमेट पहने : अगर दो पहिया वाहन चला रहे हैं या दो पहिया वाहन के चालक के साथ बैठे हैं तो हेलमेट पहनना अनिवार्य हो जाता है। यह आपको सड़क दुर्घटना से बचाता है। सड़क दुर्घटना में ब्रेन हेमरेज होने की संभावना बहुत अधिक रहती है।
  • व्यायाम : शरीर को चुस्त और दुरुस्त रखें। आप जितने स्वस्थ रहेंगे बीमारियां आपसे उतना ही दूर रहेगीं। शरीर के कसरत और व्यायाम करने से दिमाग भी सक्रिय रहता है।

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निष्कर्ष

ब्रेन हेमरेज एक ऐसी बीमारी है जो मस्तिष्क में नस के फट जाने से होती है। ऐसे में सिर की देखभाल करना इसका सबसे प्रमुख बचाव हो जाता है। इसके अतिरिक्त खानपान में भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। आयरन, फाइबर, मैग्नीशियम, कैल्शियम, विटामिन के युक्त आहार ब्रेन हेमरेज से मुक्ति दिलाता है। ब्लड प्रेशर को कम करने अर्थात कंट्रोल करने से भी ब्रेन हेमरेज ठीक हो जाता है। लेकिन दीर्घकालिक उपचार पद्धति के कारण यह बीमारी निर्धन लोगों को परेशान कर सकती है। ऐसे में धन जुटाना कठिन कार्य जान पड़ता है। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। अगर आपके जान पहचान में कोई ऐसा है जिसे ब्रेन हेमरेज के इलाज के लिए धन जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है तो उनके लिए क्राउडफंडिंग एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

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