मसूड़ों का कैंसर एक प्रकार का मुँह का कैंसर है। यह कैंसर सिर और गर्दन के कैंसर के रूप में भी जाना जाता है, जिसका विकास मसूड़ों से होता है। मसूड़ों का कैंसर सामान्य कैंसर की श्रेणी में भले ही नहीं आता हो लेकिन समय पर पहचान ना होने से इसके घातक परिणाम हो सकते हैं। वैसे इस कैंसर के लक्षणों के विषय में चर्चा की जाए तो गम कैंसर के लक्षण में शामिल हैं, मसूड़ों में सूजन आना, मसूड़ों से खून आना, मुँह या मसूड़ों में दर्द होना, निगलने में दिक्कत होना इत्यादि। बीमारी के लक्षणों की प्रारंभिक पहचान के आधार पर ही इस रोग का निदान और पूर्णतः सफ़ल उपचार संभव है।

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मसूड़ों का कैंसर क्या है ?

मसूड़ों का कैंसर, गम कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। इस कैंसर में कोशिकाएँ मुँह के उस हिस्से में फैलती हैं जो दाँतों से जुड़े होते हैं। यह कैंसर मसूड़ों में असामान्य रूप से कोशिकाओं के बढ़ने से होती है और यही बढ़ती हुई कोशिकाएँ आगे ट्यूमर और कैंसर का रूप ले लेती हैं। मसूड़ों का कैंसर मुँह से संबंधित है इसलिए यह एक मुँह के कैंसर का प्रकार है। यह कैंसर मुँह के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, जैसे होठ, गालों का भीतरी भाग,कठोर और नरम तालू, गला, जीभ आदि। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर वर्ष ओरल कैविटी और ग्रसनी(ग्रासनली) के कैंसर के लगभग ६५७,००० मामले की पहचान की जाती है, जिसमें जीवनशैली और आनुवांशिक कारकों के कारण भारत में भी इस कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
मसूड़ों के कैंसर के लक्षण / गम कैंसर के लक्षण
मसूड़ों का कैंसर होने पर, मसूड़ों और मुँह से संबंधित कई समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। मसूड़ों के कैंसर के लक्षण या गम कैंसर के लक्षण भी मुँह के कैंसर के लक्षण के समान हो सकते हैं। कई बार मसूड़ों में सूजन या मुँह में अल्सर (दर्दनाक घाव जो मुँह में होता है) होना आम है लेकिन यदि यह समस्याएँ दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहें तब चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है। नीचे दिए हुए बिंदुओं के माध्यम से इसके कुछ सामान्य लक्षणों को समझाने के प्रयास किया गया है:
१) मसूड़ों में सूजन या गाँठ महसूस करना: मसूड़ों में सूजन या गाँठ का महसूस करना मसूड़ों के कैंसर के लक्षण में से एक हो सकता है। प्रारंभिक चरणों में दर्द कम हो सकता है लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ दर्द बढ़ सकता है।
२) मसूड़ों से रक्तस्त्राव होना: मसूड़ों से खून आना मसूड़ों की किसी बीमारी का लक्षण भी हो सकता है लेकिन मुँह की नियमित सफ़ाई के बाद भी यदि मसूड़ों से खून लगातार आ रहा है तो यह मसूड़ों का कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
३) दाँतों की फ़िटिंग में दिक्कत महसूस होना: यदि आपके दाँत या नकली दाँत की फ़िटिंग में अचानक से बदलाव हुए हों तो यह मसूड़ों का कैंसर के लक्षण या गम कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
४) मुँह में लगातार घाव रहना: मुँह में घाव या अल्सर का दो सप्ताह से अधिक तक ठीक ना होना भी गम कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
५) मुँह या मसूड़ों में दर्द होना: मुँह, गले या मसूड़ों में दर्द रहना भी मसूड़ों के कैंसर के लक्षण में शामिल हो सकता है।
६) चबाने या निगलने में दिक्कत महसूस करना: चबाने या निगलने में दिक्कत महसूस करना गम कैंसर के लक्षण में से एक लक्षण हो सकता है। अधिकतर यह लक्षण उन्नत गम कैंसर का संकेत होता है।
७) बोलने में दिक्कत महसूस करना: मसूड़ों का कैंसर के लक्षण में एक लक्षण यह भी सामान्य है। यह समस्या अधिकांश, मुँह में सूजन या गाँठ से उत्पन्न होती है।
स्मरण रहे, कई बार यह लक्षण कैंसर से संबंधित नहीं भी हो सकते हैं लेकिन फिर भी लक्षणों के मसहूस करने पर चकित्सक से सलाह लेना आपके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।

क्या हैं मसूड़ों के कैंसर के कारण (मसूड़ों का कैंसर कैसे होता है)?
मसूड़ों का कैंसर, अन्य कैंसर की तरह ही कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन से होता है। मसूड़ों का कैंसर कैसे होता है, यदि इस विषय पर चर्चा की जाए तो यह मसूड़ों में असामान्य रूप से कोशिकाओं के बढ़ने से होती है। यह बढ़ती हुई कोशिकाएँ ट्यूमर का निर्माण करती हैं और आसपास के हिस्सों को भी प्रभावित करती हैं। मसूड़ों के कैंसर का अब तक कोई सही कारण नहीं पता चल पाया है लेकिन कुछ कारण जो बीमारी को बढ़ावा देते हैं वह इस प्रकार हैं:
१) तम्बाकू का सेवन: सिगरेट, सिगार, पाइप, तम्बाकू इत्यादि का सेवन करने से गम कैंसर होने ख़तरा बढ़ सकता है।
२) शराब का भारी मात्रा में सेवन: अत्यधिक मात्रा में भी शराब के सेवन इस मुँह के कैंसर को बुलावा दे सकता है।
३) ह्यूमन पेपिलोमा वायरस: मसूड़ों के कैंसर के फैलने में एचपीवी वायरस का भी बहुत हद तक योगदान होता है।
४) सुपारी का सेवन: भारत के कई जगहों पर सुपारी खाना या चबाना सामान्य है, सुपारी चबाने से भी मुँह में मसूड़ों की सतह पर कैंसर कोशिकाएँ विकसित हो सकती हैं।
५) मुँह की सफ़ाई ना करना: नियमित रूप से मुँह की सफ़ाई नहीं करने से भी यह बीमारी हो सकती है।
६) प्रतिरक्षा प्रणाली का कमज़ोर होना: कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को यह बीमारी बहुत ही आसानी से अपनी चपेट में ले सकता है, इसलिए इन्हें अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।
७) बढ़ती उम्र: वैसे तो मसूड़ों का कैंसर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है लेकिन अधिकतर यह बीमारी बुजुर्गों में पाई जाती है।
८) होठों की त्वचा का अत्यधिक सूरज से संपर्क: होठों का सूरज से संपर्क भी इस बीमारी का एक कारण है लेकिन यह कारण इतना महत्त्वपूर्ण नहीं हैं।
बीमारी के उपरोक्त कारकों को यदि ध्यान में रखा जाए तो मसूड़ों के कैंसर से बचा जा सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि, यही कारक हमेशा बीमारी का कारण बनें लेकिन इन कारकों के कारण गम कैंसर को बढ़ावा मिल सकता है।
मसूड़ों के कैंसर का निदान
मसूड़ों के कैंसर का निदान सामान्यतः कुछ शारीरिक परीक्षणों द्वारा किया जाता है। बीमारी के लक्षणों की पहचान के लिए, चिकित्सक मुख्य रूप से होठ और मुँह की जाँच करते हैं। इसमें मसूड़ों के आगे और पीछे की सतह, मुँह के ऊपरी और निचली सतह, गले की भीतरी सतह की जाँच की जाती है। जाँच के दौरान यदि मुँह या गले के कैंसर के लक्षणों की पहचान होती है तो चिकित्सक निम्न परीक्षणों को कराने के लिए सलाह दे सकते हैं:
१) बायोप्सी: बायोप्सी में घाव या गाँठ से कोशिकाएँ का एक सैंपल निकाला जाता है। इस सैंपल को माइक्रोस्कोप के द्वारा, गम कैंसर के परीक्षण के लिए जाँचा जाता है।
२) एंडोस्कोपी: कुछ केसेस में, गले की जाँच के लिए और बेहतर प्रतिबिंबों को प्राप्त करने के लिए, गले के द्वारा एंडोस्कोपी कैमरा शरीर के अंदर डाला जाता है। यह कैमरा इतना छोटा होता है कि जिससे रोगी को ना तो कोई दर्द होता है और ना किसी और प्रकार की समस्या।
३) इमेजिंग टेस्ट: एक्स-रे, सीटीस्कैन, एमआरआई स्कैन और पीईटी स्कैन के द्वारा इमेजिंग परीक्षण से यह पता लगाना आसान होता है कि मसूड़ों के कैंसर, मसूड़ों से अन्य भागों में फैले हैं या नहीं।
उपरोक्त परीक्षणों के बाद यदि मसूड़ों के कैंसर के लक्षण पाए जाते हैं तब इससे कैंसर के चरण को भी आसानी से निर्धारित किया जा सकता है। कैंसर के चरण का पता चलने के बाद ही शरीर में कैंसर की मात्रा और उपचार विकल्पों को निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है। कैंसर के चरणों को रोमन अंकों द्वारा दर्शाया जाता है जैसे चरण I (सबसे कम उन्नत चरण) से चरण IV(सबसे अधिक उन्नत चरण) तक।
मसूड़ों के कैंसर का उपचार
मसूड़ों के कैंसर का उपचार पूर्णतः, कैंसर किस भाग में है, कितना फैला है और कैंसर के चरण पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त कैंसर निचले मसूड़ों में है या ऊपरी मसूड़ों में, इस बात पर भी इसका इलाज आधारित होता है। रोगी की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं का भी इस दौरान ध्यान रखा जाता है। नीचे दिए हुए बिंदुओं के माध्यम से कुछ उपचार विधियों के विषय में आप जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:
१) सर्जरी: मसूड़ों के कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी प्रथम सीढ़ी है। सर्जरी के माध्यम से कैंसर ट्यूमर और किसी लिम्फ नोड्स को हटाना आसान होता है।
२) रेडिएशन थेरेपी: रेडिएशन थेरेपी के दौरान, एक्स-रे और प्रोटॉन जैसे उच्च शक्ति वाले ऊर्जा विकिरण का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग सामान्यतः बचे हुए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए सर्जरी के बाद किया जाता है।
३) कीमोथेरेपी: कीमोथेरेपी के दौरान, शरीर के कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाइयों का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग अकेले या रेडिएशन थेरेपी के साथ किया जा सकता है।
४) टार्गेटेड थेरेपी: यह एक नए प्रकार की उपचार विधि है। इस थेरेपी के दौरान कैंसर कोशिकाओं के विशेष हिस्सों को टार्गेट कर उपचार किया जाता है।
५) इम्यूनोथेरपी: इस उपचार विधि में कैंसर से लड़ने के लिए दवाइयों का उपयोग कर शरीर के इम्यून सिस्टम को मज़बूत किया जाता है।
६) प्रशामक देखभाल: प्रशामक देखभाल, देखभाल का एक प्रकार है जिसके दौरान गंभीर बीमारी वाले रोगियों को तनाव और बीमारी के लक्षणों से राहत प्रदान करने जैसे कार्यों पर ध्यान दिया जाता है।
उपरोक्त उपचार विधियों का उपयोग बीमारी को कम या ठीक करने के लिए प्रभावी हो सकता है लेकिन इन उपचार विधियों के उपयोग से रोगी के शरीर में साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जैसे दर्द रहना, निगलने में दिक्कत महसूस करना, बोलने में कठिनाई होना या आवाज़ में परिवर्तन होना। इन साइड इफेक्ट्स से बचने या इन्हें ठीक करने के लिए स्वास्थ्य सेवा टीम से सलाह लिया जा सकता है।
रोग का निदान और जीवित रहने की दर
अन्य कैंसर की तरह, मसूड़ों के कैंसर या गम कैंसर में भी जीवित रहने की दर कैंसर के उस चरण पर निर्भर करती है जिस पर रोग का निदान हुआ हो। लक्षणों के शुरूआती पहचान से रोग का निदान आसानी से किया जा सकता, लेकिन समस्या यह भी है कि मसूड़ों के कैंसर के कई केस में रोग का निदान तब तक नहीं किया जा सकता जब तक वह पूर्ण रूप से विकसित या उन्नत ना हो जाएँ। परिणामस्वरूप, उपचार करने में बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और जीवित रहने की दर भी कम हो जाती है। यदि रोग के निदान की बात करें तो जीवित रहने की दर को पाँच साल मानकर इस पर चर्चा की जा सकती है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, मुँह के कैंसर में, कैंसर एक भाग से दूसरे भागों में नहीं फैला हो तो रोगी के पाँच साल की जीवित रहने की दर लगभग ८४% होती है। यदि कैंसर आसपास की कोशिकाओं या अंगों या लिम्फ नोड्स में फैल गया हो तो पाँच साल की जीवित रहने की दर ६४% होती है। यदि कैंसर शरीर के दूर के हिस्सों में फैल चुका हो तो पाँच साल की जीवित रहने की दर ३९% होती है। इस बात का स्मरण रखें कि जीवित रहने की दर केवल संख्याएँ हैं और इस बीमारी से लड़ना हर किसी के लिए एक चुनौती है। व्यक्ति का संपूर्ण स्वास्थ्य, उपचार के लिए कैंसर की बेहतर प्रतिक्रिया, मानसिक और भवनात्मक तौर पर मज़बूती, रोग के निदान में यह सभी मुख्य किरदार होते हैं।
मसूड़ों के कैंसर की रोकथाम
मसूड़ों के कैंसर को फैलने से पूर्णतः रोका नहीं जा सकता लेकिन एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से बहुत हद तक बचा जा सकता है।
१) तम्बाकू और शराब: तम्बाकू और शराब के सेवन से बचना, मसूड़ों के कैंसर को फैलने से बहुत हद तक रोक सकता है।
२) स्वस्थ आहार: स्वस्थ आहार लेने से, गम कैंसर के ख़तरे से बचा जा सकता है।
३) मुँह की सफ़ाई: नियमित रूप से मुँह की सफ़ाई भी इस बीमारी से बचने में सहयता कर सकती है।
४) एचपीवी टीकाकरण: मसूड़ों के कैंसर या मुँह के अन्य कैंसर के फैलने का एचपीवी भी एक महत्त्वपूर्ण कारण है। अतः एचपीवी का टीका लगवाने से इस कैंसर से बचा जा सकता है।
५) सूरज से कम संपर्क: सन प्रोटेक्शन फ़ैक्टर (एसपीएफ़) के साथ लिप बाम और अन्य सूर्य संरक्षण के उपयोग से इस बीमारी को प्रसारित होने से रोका जा सकता है।
६) नियमित परीक्षण: दाँतों की नियमित जाँच, मसूड़ों के कैंसर की शुरूआती अवस्था में पहचान करने में सहायता प्रदान कर सकती है।
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निष्कर्ष
मसूड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन नियमित जाँच के साथ इसके लक्षणों और कारणों पर ध्यान देना और इन्हें समझना, रोग की प्रारंभिक पहचान करने और इसके इलाज में पूर्णतः सहायता कर सकता है। यदि आप अपने मुँह में घाव, दर्द या दाँतों या मसूड़ों में बदलाव जैसे लक्षणों को लंबे समय से महसूस कर रहे हैं तो चिकित्सक से संपर्क करना अति आवश्यक है।
जहाँ गम कैंसर के इलाज, कुछ वर्षों से बहुत हद तक सफ़ल हो रहे हैं और जीवित रहने की दर में भी सुधार हो रहा है, मसूड़ों के कैंसर को फैलने से रोकने के लिए रोकथाम बहुत ही बेहतर रणनीति बन चुकी है। तम्बाकू और शराब का सेवन नहीं करने से, मुँह की नियमित सफ़ाई करने से, स्वस्थ आहार लेने से और जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव से, मसूड़ों के कैंसर को फैलने से बहुत हद तक कम किया जा सकता है। इस बात को कभी ना भूलें कि हमारा स्वास्थ्य हमारी सबसे कीमती संपत्ति है। सचेत रहें, सतर्क रहें और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।
इस लेख के माध्यम से हमारा उद्देश्य है मसूड़ों के कैंसर के प्रति जानकारी प्रदान करना। इस लेख का उपयोग, रोग के निदान के उद्देश्य से ना करें। रोग के लक्षणों को महसूस करने पर केवल अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
एक नज़र यहाँ भी
यदि आपके मन में अभी भी यह सवाल है कि मसूड़ों का कैंसर कैसे होता है , तो इसे संक्षेप में यहाँ समझाने का प्रयास किया गया है:
यदि संक्षेप यह समझा जाए कि मसूड़ों का कैंसर कैसे होता है, तो मसूड़ों का कैंसर मुँह में मसूड़ों से संबंधित है। इस तरह का कैंसर, मसूड़ों में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। इस बीमारी में आप मसूड़ों में सूजन, दर्द या मसूड़ों से खून का आना, चबाने या निगलने में दिक्कत महसूस करना जैसे लक्षण महसूस कर सकते हैं। यदि इसके जोखिम कारकों की बात की जाए तो इसमें, तम्बाकू और शराब का भारी मात्रा में सेवन करना, मुँह की सफ़ाई ना करना और इम्यून सिस्टम का कमज़ोर होना जैसे कारक शामिल हैं।






















